Asides

क्या कहानी कहे पिछड़ने की

क्या कहानी कहे पिछड़ने की
उम्र थी तीतीलिया पकड़ने की
घर तो बसना था , बस गया लेकिन
एक कसक सी है कुछ उजड़ने की ,
अच्छी लगी थी , उन दिनों तालिब
दोस्ती में अदा बिगड़ने की- Anonymus

COPIED

 

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ख्वाहिशे …..

सुबह की वो ख्वाहिशे , शाम तक टाली हैं ||
कुछ इस तरह जिंदगी हमने संभाली हैं ||