All posts by Dhananjay Yadav

Software Engineer @ Unicode Systems Private Limited

फिर से तुम आ गए ।।

फिर से तुम आ गए ।।
मै चला जा रहा था , बेफिक्र सा
ना कोई मक़सद था न कोई मंजिल
ना कोई उम्मीद और न कोई महफ़िल
बस वक़्त था जो बदल रहा था
जिंदगी करवटें ले रही थी
ख्वाब अँगड़ाईंया ले रहे थे
नज़ारे धुंधली पड़ रही थी
साँसे थमती जा रही थी
जख्म उभरते जा रहे थे
यार बिछड़ते जा रहे थे
अँधेरा बढ़ता जा रहा था
दिन ढलता जा रहा था
रंग उड़ाते जा रहे थे
रूह पिघलती जा रही थी
ऐतबार टूटता जा रहा था
आंसू जमते जा रहे थे
इश्क भूलता जा रहा था
घर बिखरता जा रहा था
उम्र तरसती जा रही थी
प्यास सूखती जा रही थी
और फिर से तुम आये ।।

Advertisements

क्या कहानी कहे पिछड़ने की

क्या कहानी कहे पिछड़ने की
उम्र थी तीतीलिया पकड़ने की
घर तो बसना था , बस गया लेकिन
एक कसक सी है कुछ उजड़ने की ,
अच्छी लगी थी , उन दिनों तालिब
दोस्ती में अदा बिगड़ने की- Anonymus

COPIED

 

ख्वाहिशे …..

सुबह की वो ख्वाहिशे , शाम तक टाली हैं ||
कुछ इस तरह जिंदगी हमने संभाली हैं ||

जिद थी …

जमी पे सितारे सजाने की जिद थी
हमें उनको अपना बनाने की जिद थी
उन्हें कब थी फुर्सत सुने दिल की दास्तान मेरी
लेकिन हमें उनको सुनाने की जिद थी

….अरे सही वक़्त पे अक्ल आ गयी वरना
हमें खुद को उनपे मिटने की जिद थी

 

—–UNKNOWN

मैं सपने में रोटी खा रहा था?

वो इक्कीसवी शदी का भूखा ,
जन्मीं पे खिंचा उसने एक चौकोर घेरा ,
बोला देखो ये सुन्दर घर है मेरा ,
इसमें न छत है, ना दीवार है ,
फिर भी ये मजबूत है ,
यही इस बात का सबूत है
कि आंधी या तूफान इसे हिला नहीं सकते ,
वो धुप में वही सो गया,
दिन में ही खवाबों में खो गया,
जैसे ही वह नींद से जागा,
हमने उसपे सवाल दागा ,
भाई साहब जब आप सोये हुए थे
किन ख्यालों में खोये हुए थे
वो बोला मुझे बहुत मज़ा आ रहा था ,
मैं सपने में रोटी खा रहा था ,
और इतना खुश था , इतना खुश था;
ख़ुशी कि राह में गुजर गया ,
और ज़माने को पता भी नह चला ||

Image [http://images.fineartamerica.com/images-medium-large/beggers-childlife-toton-das.jpg]

वायदे इश्क़

न आग जाने न हवा जाने ;
कब नशेमन जला , खुद जाने ;
जब से वायदे इश्क़ पी लीया;
न दर्द जाने , न दावा जाने ||–Anonymous.

तमन्ना….

कुछ तो जीते है जन्नत की तमन्ना लेकर ,
और कुछ तमन्नाये जीना सीखा देती है|
हम किस तमन्ना के सहारे जिए ,
ये जिंदगी तो रोज़ एक तमन्ना बढ़ा देती है ||