जिद थी …

जमी पे सितारे सजाने की जिद थी
हमें उनको अपना बनाने की जिद थी
उन्हें कब थी फुर्सत सुने दिल की दास्तान मेरी
लेकिन हमें उनको सुनाने की जिद थी

….अरे सही वक़्त पे अक्ल आ गयी वरना
हमें खुद को उनपे मिटने की जिद थी

 

—–UNKNOWN